नई दिल्ली, 30 अगस्त 2025 — वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7.8% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बीते पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। यह आंकड़ा अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है, खासकर तब जब रिज़र्व बैंक (RBI) और अधिकांश विश्लेषकों ने इसे 6.4% से 6.7% के बीच रहने का अनुमान लगाया था।
क्या है GDP का यह आंकड़ा?
यह 7.8% की वृद्धि दर वर्ष दर वर्ष (YoY) आधार पर है। यानी अप्रैल-जून 2024 की तुलना में, अप्रैल-जून 2025 में भारत ने 7.8% अधिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किया। अगर बात करें रियल GDP (2011-12 की कीमतों पर), तो देश ने इस तिमाही में ₹47 लाख करोड़ मूल्य की वस्तुएं और सेवाएं उत्पादित कीं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹44.4 लाख करोड़ था।
वहीं नॉमिनल GDP (मौजूदा कीमतों पर) की वृद्धि दर 8.8% रही और कुल मूल्य ₹86 लाख करोड़ के आसपास दर्ज किया गया।
GDP ग्रोथ का सूत्र:
GDP = C + I + G + (X – M)
- C = निजी उपभोग व्यय
- I = निजी निवेश
- G = सरकारी खर्च
- X – M = शुद्ध निर्यात
इस तिमाही में:
- निजी खपत में ~7% की वृद्धि
- सरकारी खर्च में ~7.4% की वृद्धि
- निवेश (Gross Fixed Capital Formation) में ~7.8% की तेजी
- सेवाओं का योगदान देश की GDP में 55% से अधिक रहा
किसने दी गति? – सेक्टर विश्लेषण:
सेक्टर | वृद्धि दर |
---|---|
कृषि, पशुपालन, वानिकी, मत्स्य | 3.5% (अनुमानित) |
निर्माण (Construction) | 7.6% |
मैन्युफैक्चरिंग | 7.7% |
ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट | 8.6% |
वित्त, रियल एस्टेट, प्रो. सेवाएं | 9.5% |
पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, डिफेंस | 9.8% |
GVA (सकल मूल्य वर्धन) भी 7.6% रहा — यह उत्पादन पक्ष को दर्शाता है।
इस बेहतर प्रदर्शन के पीछे के कारण:
- सरकारी पूंजीगत खर्च: रेलवे, रोड, डिफेंस व इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश
- हाउसिंग डिमांड में उछाल: सीमेंट, स्टील सेक्टर को बढ़ावा
- सेवाओं में निरंतर वृद्धि: हॉस्पिटैलिटी, आईटी, एविएशन, ट्रांसपोर्ट में तेजी
- मजबूत घरेलू मांग: ग्रामीण भारत में बेहतर मानसून के कारण उपभोग बढ़ा
- GST संग्रहण में सुधार: औपचारिक आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के संकेत
- निर्यात में गिरावट नहीं: वैश्विक दबाव के बावजूद एक्सपोर्ट अपेक्षाकृत स्थिर
अनुमान क्यों चूके?
- RBI ने 6.5% की उम्मीद जताई थी, क्योंकि वैश्विक स्तर पर अमेरिका-चीन व्यापार तनाव, टैरिफ्स, और फॉरेन इन्वेस्टर्स की सतर्कता से गिरावट की आशंका थी।
- लेकिन मजबूत डोमेस्टिक डिमांड और गवर्नमेंट-संचालित निवेश चक्र ने इन प्रभावों को संतुलित किया।
आगे के जोखिम:
संभावित खतरे | प्रभाव |
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अमेरिकी टैरिफ (50%) | टेक्सटाइल व एक्सपोर्ट पर दबाव |
निजी निवेश की सुस्ती | लंबे समय में स्थायित्व पर असर |
शहरी खपत में कमजोरी | लग्ज़री आइटम, वाहन क्षेत्र पर असर |
मानसून से फसलों पर असर | कृषि आउटपुट और ग्रामीण डिमांड प्रभावित हो सकती है |
खाद्य मुद्रास्फीति (टमाटर, दूध) | महंगाई का संभावित दबाव |
निष्कर्ष:
भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था की लचीलापन का परिचय देते हुए न केवल अनुमानों को पछाड़ा है, बल्कि वैश्विक मंच पर सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान मजबूत किया है।
यदि आगामी तिमाहियों में मानसून, एक्सपोर्ट, और निजी निवेश की स्थिति स्थिर रहती है, तो 2025-26 में भारत की GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रह सकती है, जो एक मजबूत और स्थायी विकास की दिशा में कदम होगा।