29 अगस्त 2025 को इज़रायल ने गाज़ा सिटी में अपना हमला और तेज कर दिया। इस नए चरण को ऑपरेशन गिडिओन’स चेरीअट्स II नाम दिया गया है। सरकार ने पूरे शहर को “खतरनाक युद्ध क्षेत्र” घोषित करते हुए यह भी साफ कर दिया कि अब मानवीय मदद के लिए दी जाने वाली अस्थायी छूट, जिसे अब तक राहत सामग्री और इलाज पहुँचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, पूरी तरह बंद रहेगी। इसका सीधा असर उन लाखों लोगों पर पड़ा है जो पहले से ही खाने, पानी और दवाइयों की कमी से जूझ रहे हैं।
हवाई हमलों और तोपों की गोलाबारी ने गाज़ा के कई इलाकों को हिला दिया। अल-ज़ैतून और जबालिया जैसे घनी आबादी वाले मोहल्लों में घर ध्वस्त हो गए और कई परिवार मलबे में दब गए। इन हमलों में दर्जनों नागरिक मारे गए और कई घायल हुए। अक्टूबर 2023 से अब तक मौत का आंकड़ा 31 हज़ार से ऊपर पहुँच चुका है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं। अस्पताल पहले से ही बोझ से दबे हैं, और अब लगातार होती बमबारी ने हालात को और भी भयावह बना दिया है।
लगातार विस्फोटों और गोलाबारी से लोग जान बचाने के लिए अपने घरों से पलायन कर रहे हैं। शरण के लिए स्कूल, मस्जिदें और अस्थायी शिविर भरे पड़े हैं। लेकिन वहाँ भी पानी और भोजन जैसी बुनियादी ज़रूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। जिन परिवारों ने एक बार घर छोड़ा था, वे अब दूसरी बार भी सुरक्षित जगह तलाशने को मजबूर हैं। बच्चे लगातार भय में जी रहे हैं और कई परिवार बिछड़ चुके हैं।
इस पूरे परिदृश्य ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी चिंतित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए दोनों पक्षों से संयम बरतने और मानवीय सहायता को सुरक्षित रूप से पहुँचने देने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो गाज़ा में पहले से चल रहा मानवीय संकट एक और बड़े हादसे में बदल सकता है।
गाज़ा से निकल रही तस्वीरें और आवाज़ें यह बताने के लिए काफी हैं कि यह संघर्ष अब केवल दो सेनाओं की जंग नहीं रहा, बल्कि हर दिन आम लोगों की ज़िंदगी और मौत की लड़ाई बन चुका है। यहाँ के नागरिक न सिर्फ़ बम और गोलियों से जूझ रहे हैं, बल्कि भूख, बीमारी और बेघर होने की त्रासदी भी उनके सामने खड़ी है। दुनिया भर से उठती निंदा और अपीलों के बावजूद ज़मीन पर हालात हर बीतते दिन और भयावह होते जा रहे हैं।