दो वॉरशिप्स — एक साथ, स्वदेशी, शक्तिशाली और पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’। नाम हैं — आईएनएस उदयगिरी और आईएनएस हिमगिरी। ये सिर्फ दो युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती समुद्री ताकत की हुंकार हैं।”
कमिशनिंग क्या होता है?
“जब कोई वॉरशिप पानी में छोड़ा जाता है, तो उसे ‘लॉन्च’ कहते हैं। लेकिन ‘कमिशनिंग’ यानी अब वो शिप इंडियन नेवी के हवाले कर दिया गया है। ट्रायल, टेस्ट, हथियार, सेंसर — सब कुछ पूरा। अब ये पूरी तरह से ऑपरेशनल है। दुश्मन चाहे कहीं भी हो, ये पहुंच सकते हैं।”
आईएनएस उदयगिरी
- बनाया: मज़गांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई
- डिलीवरी: 1 जुलाई, 2025
- खासियत: 100वीं डिज़ाइन वॉरशिप बाय वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो
आईएनएस हिमगिरी
- बनाया: गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता
- डिलीवरी: 31 जुलाई, 2025
- खासियत: पूर्ववर्ती लियंडर-क्लास हिमगिरी की विरासत को आगे बढ़ाता है
इनकी ताकत क्या है?
- स्टील्थ फ्रिगेट्स — रडार से बच निकलने की क्षमता
- मल्टीरोल कॉम्बैट शिप्स — युद्ध, रेस्क्यू, गश्त… हर मोर्चे पर तैयार
- लंबाई: 149 मीटर
- डिस्प्लेसमेंट: 6700 टन
- स्पीड: 28 नॉट्स से ज़्यादा
- एंड्योरेंस: 5500 नॉटिकल माइल्स
- क्रू: 225 नेवी जवान
- हथियार:
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल
- बराक 8 सरफेस टू एयर मिसाइल
- 127mm गन
- एंटी-सबमरीन सिस्टम (टॉरपीडो, रॉकेट)
- रडार: MF-STAR
- हेलीपैड: मीडियम हेलिकॉप्टर की सुविधा
- प्रोपल्शन: डीज़ल + गैस टर्बाइन
प्रोजेक्ट 17A — भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता की रीढ़
“नीलगिरि क्लास फ्रिगेट्स — शिवालिक क्लास के अपग्रेडेड वर्जन। मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन से तैयार। 70-75% स्वदेशी कंटेंट। सात जहाज बनने हैं — तीन तैयार, चार आने वाले हैं।”
इंडस्ट्री का योगदान
“200+ MSMEs ने हथियार, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजन सिस्टम्स में योगदान दिया। हजारों डायरेक्ट और इनडायरेक्ट नौकरियां बनीं। और सबसे बड़ी बात — दो अलग-अलग यार्ड्स से एक साथ दो युद्धपोत बनकर तैयार हुए। ये शक्ति अब कुछ ही देशों के पास है।”
भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति में नई धार
“आईएनएस उदयगिरी और हिमगिरी को इंडो-पैसिफिक में तैनात किया जाएगा — जहां भारत अपनी ब्लू वॉटर नेवी क्षमता दिखा रहा है। अफ्रीका से लेकर पेसिफिक तक भारत की मौजूदगी अब और मजबूत होगी। एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप्स को भी सुरक्षा मिलेगी — भारत की समुद्री शेरनी अब और भी ताकतवर है।”
यह सिर्फ दो वॉरशिप्स की कमिशनिंग नहीं है — यह आत्मनिर्भर भारत का जलपराक्रम है। यह दर्शाता है कि भारत अब सिर्फ एक उपभोक्ता नहीं, एक निर्माता है — अत्याधुनिक तकनीक का, आत्मनिर्भरता का और शक्ति का। ये भारत का वो रूप है जो अपने समुद्रों की रक्षा भी कर सकता है… और अपने हितों को जहां चाहे वहां तक पहुंचा सकता है।”