इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) ने सेमीकंडक्टर कॉम्प्लेक्स लिमिटेड (SCL) मोहाली को मॉडर्नाइज करने के लिए सरकार द्वारा घोषित 4,500 करोड़ रुपये के निवेश की सराहना की है।
आईईएसए का कहना है कि यह निवेश भारत की चिप मैन्युफैक्चरिंग और प्रोटोटाइपिंग क्षमता को नई ऊंचाई देगा।
एसोसिएशन का मानना है कि अपग्रेडेड एससीएल छोटे पैमाने पर फैब्रिकेशन, पायलट प्रोडक्शन और शुरुआती स्तर के चिप प्रोटोटाइप को सपोर्ट करेगा।
इससे इनोवेशन को सीधे बाजार तक पहुंचाने में बड़ी मदद मिलेगी।
आईईएसए के प्रेसिडेंट अशोक चांडक ने केंद्र और राज्य सरकारों से भूमि आवंटन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्लीयरेंस में तेजी लाने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि तेज प्रक्रिया से अनिश्चितता और देरी को रोका जा सकेगा।
एसोसिएशन ने बताया कि एससीएल प्लांट को 180nm तकनीक नोड के लिए मॉडर्नाइज किया जाएगा।
इस अपग्रेड से उत्पादन क्षमता में 100 गुना बढ़ोतरी होने की संभावना है।
साथ ही, भविष्य में लोअर नोड्स के लिए भी यही सेटअप आधार बनेगा।
इस बढ़ी हुई क्षमता को भारत की रणनीतिक जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डिफेंस, एयरोस्पेस, स्पेस और अन्य संवेदनशील सेक्टरों के लिए विश्वसनीय और स्वदेशी सेमीकंडक्टर उत्पादन बेहद आवश्यक है।
IESA ने यह भी कहा कि SCL एक नेशनल ट्रेनिंग एवं कैपेसिटी-बिल्डिंग सेंटर के रूप में भी विकसित हो सकता है।
यह EDA-टूल एक्सेस, हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग और इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग के माध्यम से भविष्य के चिप टैलेंट को तैयार करेगा।
एसोसिएशन का कहना है कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अंतर्गत मिलने वाला फिस्कल सपोर्ट और स्थिर नीति SCL के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
इससे भारत की सप्लाई चेन और निर्यात लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने SCL मोहाली के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है।
सरकार का लक्ष्य वेफर उत्पादन को वर्तमान स्तर से 100 गुना बढ़ाना है।
एससीएल भविष्य में छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को फैब्रिकेशन सुविधाएँ प्रदान करता रहेगा।
इससे युवा नवाचारों को सिलिकॉन आधारित वास्तविक चिप के रूप में बदलने में बड़ी मदद मिलेगी।
