इटली की पर्यटक बोली भारत जादुई देश माघ मेले में उत्साह

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला पूरे भव्य स्वरूप में जारी है, देश दुनिया से श्रद्धालु और पर्यटक आध्यात्मिक अनुभव के लिए संगम नगरी पहुंच रहे हैं।

इसी दौरान इटली से आई महिला पर्यटक लुक्रेजिया ने भारत को ‘जादुई देश’ बताते हुए कहा कि यहां की संस्कृति, लोग और आध्यात्मिकता उन्हें बार-बार आकर्षित करती है।

आईएएनएस से बातचीत में लुक्रेजिया ने बताया कि वह अपने पिता के साथ दुनियाभर की यात्रा करती हैं, लेकिन भारत उनके दिल में एक विशेष स्थान रखता है।

लुक्रेजिया ने कहा, “भारत में सब कुछ खास है, यहां की संस्कृति, भोजन और हिंदू धर्म, यही वजह है कि हम बार-बार भारत आना पसंद करते हैं।”

उन्होंने बताया कि वह पहली बार 2024 में भारत आई थीं, इसके बाद 2025 में महाकुंभ में शामिल हुईं और अब 2026 में प्रयागराज के माघ मेले का अनुभव ले रही हैं।

लुक्रेजिया ने कहा कि प्रयागराज से आगे वह वाराणसी जाने की योजना बना रही हैं, जिसे दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है।

भारत यात्रा के दौरान वह आध्यात्मिक गुरुओं से भी जुड़ी हैं, लुक्रेजिया ने बताया कि उनके गुरु दया, करुणा और अनावश्यक चीजों को छोड़ने की सीख देते हैं और आत्मस्वीकार को सबसे बड़ा सबक बताते हैं।

44 दिनों तक चलने वाला माघ मेला 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पावन स्नान के साथ त्रिवेणी संगम पर शुरू हुआ, इस दौरान छह प्रमुख स्नान पर्व निर्धारित हैं और अंतिम स्नान महाशिवरात्रि पर होगा।

माघ मेले के पहले शाही स्नान में संतों और महात्माओं की बड़ी भागीदारी रही, अब तक लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं।

3 जनवरी को ही करीब 22 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया, आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मेले में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए गए हैं, शहर और मेला क्षेत्र में 1,500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी केंद्रीकृत कंट्रोल रूम से हो रही है।

आधुनिक उपकरण, वॉच टावर, वॉटर पुलिस और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, भारी भीड़ के बीच श्रद्धा और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

भव्यता, आस्था और संत परंपरा के मेल से माघ मेला 2026 ने प्रयागराज को एक बार फिर संस्कृति और श्रद्धा के शाश्वत केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया है।