उषापान की आयुर्वेदिक सलाह सेहत के लिए फायदेमंद

सेहतमंद रहने के लिए बड़े बदलावों की आवश्यकता नहीं होती, आयुर्वेद में ऐसे ही एक सरल उपाय उषापान का उल्लेख है जिसमें सुबह उठकर खाली पेट गुनगुना पानी पीना शामिल है और यह शरीर को कई लाभ देता है।

भारत सरकार का आयुष मंत्रालय उषापान को रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल करने की सिफारिश करता है, मंत्रालय का कहना है कि यह पाचन को मजबूत करता है, पेट साफ रखता है और शरीर से गंदगी बाहर निकालने में मदद करता है, साथ ही मन को तरोताजा करने में भी सहायक होता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार यदि संभव हो तो रातभर तांबे के बर्तन या मिट्टी के घड़े में रखा पानी पिया जाए, तांबे का पानी एंटी-बैक्टीरियल गुणों और सूक्ष्म खनिजों के कारण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है।

उषापान आयुर्वेद की पुरानी परंपरा मानी जाती है जिसमें सुबह उठते ही हाथ-पैर धोकर एक गिलास गुनगुना या सामान्य तापमान का पानी पीने की सलाह दी जाती है, यह सरल रूटीन किसी भी उम्र का व्यक्ति बिना कठिनाई अपना सकता है।

यह प्रैक्टिस पाचन तंत्र को शक्ति देती है, सुबह खाली पेट पानी पीने से आंतों में उत्तेजना बढ़ती है, जिससे मल और पेशाब का निष्कासन आसान होता है और कब्ज, गैस तथा अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

उषापान शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है, रातभर जमा टॉक्सिन्स पानी के जरिए बाहर निकलते हैं जिससे त्वचा साफ रहती है, शरीर हल्का महसूस होता है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत वजन नियंत्रण और मेटाबॉलिज्म सुधारने में मददगार है, नियमित पालन से पाचन से जुड़ी कई बीमारियों का जोखिम घटता है और इम्यूनिटी मजबूत होती है जिससे सामान्य मौसमी बीमारियों से बचाव संभव होता है।