गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन बुधवार को शक्ति की उपासना और दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष महत्व है, इस दिन मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा और साधना का विधान बताया गया है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि को तांत्रिक साधना का समय कहा गया है, इस दौरान देवी के विविध स्वरूपों की उपासना की जाती है, साधना को आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामना पूर्ति का माध्यम माना गया है।
इसी संदर्भ में राजस्थान के बांसवाड़ा में स्थित त्रिपुर सुंदरी मंदिर चर्चाओं में है, यह लगभग 900 वर्ष पुराना सिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है, जहां मां काली, मां सरस्वती और मां लक्ष्मी के दर्शन एक स्थान पर होते हैं।
मान्यता है कि मां त्रिपुर सुंदरी की मूर्ति श्री यंत्र पर स्थापित है, इसलिए यहां देवी की प्रतिमा में दिव्य तेज और प्रकाश दिखाई देता है, श्री यंत्र को ऊर्जा और शक्ति का अत्यंत प्रभावी प्रतीक माना गया है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, माना जाता है कि यहां देवी सती का पीठासन गिरा था, इसी कारण यह स्थल तंत्र, मंत्र और यंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माना गया है।
मंदिर से जुड़ी कथाओं में कहा गया है कि यहां की साधना शीघ्र फलदायी मानी जाती है, यह स्थान 64 योगिनियों में से एक का भी केंद्र है, इसलिए साधक और भक्त विशेष रूप से गुप्त नवरात्रि में यहां पहुंचते हैं।
किंवदंती है कि त्रिपुर सुंदरी मंदिर का निर्माण पांचाल जाति के चांदा भाई लुहार ने कराया, स्थानीय परंपराओं में बताया गया है कि देवी ने खदान क्षेत्र में प्रकट होकर दंड दिया और फिर लोगों ने मंदिर व तालाब बनवाए।
त्रिपुर सुंदरी मंदिर की खासियत यह भी है कि यहां प्रयुक्त काले पत्थर को विशेष माना जाता है, इसी प्रकार का पत्थर अयोध्या में भगवान श्रीराम की मूर्ति निर्माण में भी उपयोग हुआ है, मंदिर का समय-समय पर जीर्णोद्धार किया गया है।
मंदिर बांसवाड़ा जिले के तलवाड़ा गांव के समीप स्थित है, यह क्षेत्र अरावली पर्वतमालाओं से घिरा हुआ है और वागड़ क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है, धार्मिक दृष्टि से इसे प्राचीनकाल में पवित्र भूमि माना गया है।
पुराणों और शिलालेखों में इस क्षेत्र का उल्लेख मिलता है, स्कंदपुराण में इसे गुप्त प्रदेश कहा गया है, माही नदी को कलियुगी माही गंगा का नाम दिया गया है, नदी में स्नान को विशेष पुण्यकारी माना गया है।
माता का प्रतिदिन श्रृंगार किया जाता है, दिन के अनुसार वस्त्र और फूल अर्पित किए जाते हैं, भक्त बड़ी संख्या में दर्शन हेतु पहुंचते हैं, विशेषकर गुप्त नवरात्रि और नवरात्रि में यहां भीड़ बढ़ जाती है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि शक्ति के दर्शन से तंत्र-मंत्र साधना सफल होती है, आध्यात्मिक उन्नति मिलती है और मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं, इसलिए यह स्थान साधकों और भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
