सर्दियों में धूप सेंकना शरीर और दिमाग के लिए वरदान

सर्दियों की सुबह की धूप हल्की ठंड, कोहरे और सुनहरी किरणों के साथ शरीर को आराम देती है, आंखों के लिए सुखद होती है और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

बुजुर्ग कहते आए हैं कि रोज थोड़ी देर धूप में बैठना चाहिए, अब विज्ञान भी मान चुका है कि सर्दियों में धूप सेंकना सिर्फ आराम नहीं बल्कि शरीर और दिमाग के लिए वरदान है।

सूरज की किरणें त्वचा पर पड़ते ही शरीर में विटामिन-डी बनने लगता है, यह विटामिन हड्डियों, मांसपेशियों और इम्युनिटी के लिए बेहद आवश्यक माना जाता है, सर्दियों में सूर्य प्रकाश कम होने के कारण इसकी जरूरत और बढ़ जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में वात और कफ दोष बढ़ते हैं, जिससे शरीर जकड़ता है, धूप शरीर में ऊर्जा और गर्मी उत्पन्न करती है, सुस्ती और ठंड से होने वाला दर्द कम करती है और जड़ों की जकड़न में राहत देती है।

सिर्फ 20 से 30 मिनट की सही धूप कई बार सप्लीमेंट से ज्यादा प्रभावी मानी जाती है, हड्डियां मजबूत होती हैं, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द कम होता है और कैल्शियम के अवशोषण में सुधार होता है।

बच्चों और बुजुर्गों में कमजोरी रोकने में भी सर्दियों की धूप महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इम्यूनिटी सक्रिय रहती है और मौसमी संक्रमणों से बचाव होता है।

धूप के संपर्क से सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ता है, तनाव कम होता है और मूड बेहतर होता है, आयुर्वेद इसे मन को प्रसन्न करने वाली प्राकृतिक औषधि बताता है।

सर्दियों में धूप से रक्त संचार सक्रिय होता है, हाथ-पैरों के जमेपन और ठंड में राहत मिलती है और रोग प्रतिरोधक कोशिकाएं बेहतर काम करती हैं।

विशेषज्ञ सुबह 9 बजे से 11 बजे तक की धूप सबसे लाभकारी मानते हैं, हल्के कपड़े पहनकर धूप पीठ की ओर से लेने की सलाह दी जाती है।

ध्यान रखना आवश्यक है कि कांच के पीछे बैठने से विटामिन-डी नहीं बनता, इसलिए खुले में धूप लेना अधिक प्रभावी माना जाता है।