सर्दियों में कम गतिविधि से बढ़ते रोग आयुर्वेद की चेतावनी

सर्दियों में आलस की वजह से रजाई से निकलना मुश्किल हो जाता है, वहीं ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठे काम करने से शरीर की गतिविधि और कम हो जाती है, आधुनिक जीवनशैली में मस्तिष्क का उपयोग बढ़ चुका है जबकि शरीर की मेहनत घट गई है, कम शारीरिक गतिविधि सुनने में साधारण लगती है लेकिन यह कई गंभीर रोगों का कारण बन सकती है।

आयुर्वेद में कम शारीरिक गतिविधि को शरीर के लिए चेतावनी माना गया है, आयुर्वेद कहता है “अतियोग, हीनयोग और मिथ्या योग रोगों के मूल कारण हैं”, शरीर को कर्मयोग का साधन बताया गया है और लंबे समय तक निष्क्रियता से वात और कफ असंतुलित हो जाते हैं।

कम गतिविधि से कफ दोष बढ़ता है, वात दोष बिगड़ता है और पित्त दोष प्रभावित होता है, यह इम्युनिटी को घटाता है और शरीर को गंभीर बीमारियों के प्रति संवेदनशील बनाता है, आयुर्वेद के अनुसार यह स्थिति कई दीर्घकालीन रोगों को न्योता देती है।

चरक संहिता में कहा गया है “व्यायामात लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्”, यानी व्यायाम से स्वास्थ्य, दीर्घ आयु, शक्ति और सुख मिलता है, वहीं कम गतिविधि से मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियाँ तेजी से बढ़ने लगती हैं, लंबे समय तक बैठे रहने से वसा जमा होती है और मेटाबॉलिज्म कमजोर होता है।

शारीरिक निष्क्रियता से जोड़ों और हड्डियों की समस्या भी बढ़ती है, एक ही पॉश्चर में बैठे रहने से हड्डियों और मांसपेशियों में जकड़न बढ़ती है, इससे गठिया और जोड़ों के दर्द की शिकायतें बढ़ जाती हैं।

कम गतिविधि से हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम भी बढ़ता है, शरीर में रक्त संचार कम हो जाता है और ऑक्सीजन की कमी होती है, यह स्थिति ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़े रोगों को बढ़ावा देती है, रक्तचाप बढ़ने के बाद हृदय रोगों की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।

कम गतिविधि से डिप्रेशन और चिंता जैसी मानसिक समस्याएँ भी बढ़ सकती हैं, पाचन तंत्र कमजोर पड़ता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है, आयुर्वेद के मतानुसार नियमित गतिविधि ही संतुलित स्वास्थ्य की कुंजी है।