यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक का भाजपा ने किया स्वागत

भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत किया है, इसे भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यूजीसी के उन नियमों पर रोक लगना राहत देने वाला है जो समाज को बांटने का काम कर सकते थे, उन्होंने इसे सनातन की अखंड एकता की दिशा में अहम कदम बताया।

गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है, साथ ही उन्होंने मोदी सरकार की नीतियों को सबका साथ सबका विकास से जोड़ा।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी विपक्षी दलों पर तीखा हमला किया और कहा कि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय सरकार को गाली दी गई, जबकि सरकार ने ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर गरीबों के हित में काम किया है।

निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्होंने लगातार भरोसा रखने की अपील की थी और सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जिसकी उन्होंने उम्मीद जताई थी, उन्होंने संविधान की धारा 14 और 15 के तहत ही कानून चलने की बात दोहराई।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा रखना चाहिए क्योंकि सरकार संविधान के दायरे में रहकर ही फैसले ले रही है और न्यायपालिका ने भी उसी भावना के अनुरूप निर्णय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया और नए रेगुलेशन पर अंतरिम रोक लगा दी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी और तब तक वर्ष 2012 के यूजीसी रेगुलेशन ही लागू रहेंगे, जिससे मौजूदा व्यवस्था यथावत बनी रहेगी।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की, जिसमें रेगुलेशन के शब्दों और संभावित प्रभावों पर गंभीर सवाल उठाए गए।

चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि नियमों में प्रयुक्त भाषा से दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने निष्पक्ष और समावेशी समाज की जरूरत पर जोर दिया।