अक्सर लोग दांत दर्द या सूजन की परेशानी पर ही ध्यान देते हैं, लेकिन दांतों की सड़न एक साइलेंट किलर की तरह काम करती है, बाहर से चमकदार दिखने वाले दांत अंदर से कब खराब हो जाते हैं इसका अंदाजा देर से लगता है।
दांतों में सड़न की प्रक्रिया बेहद धीमी होती है और इसके शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते हैं, जब दर्द शुरू होता है तब तक सड़न दांतों को घेर चुकी होती है और असहनीय पीड़ा का कारण बन जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार दांतों में सड़न के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें ज्यादा मीठा खाना, सही तरीके से ब्रश और कुल्ला न करना, मुंह में लार की कमी, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी शामिल हैं।
रात में बिना ब्रश किए सो जाना भी दांतों की सड़न को बढ़ावा देता है, ये सभी आदतें धीरे-धीरे दांतों को कमजोर बनाकर संक्रमण की वजह बन सकती हैं।
आयुर्वेद में दांतों की सड़न से बचाव और मसूड़ों की मजबूती के लिए कई आसान घरेलू उपाय बताए गए हैं, जिन्हें घर पर नियमित रूप से अपनाया जा सकता है।
लौंग का तेल दांतों के दर्द और बैक्टीरिया को कम करने में मदद करता है, रात के समय कुछ देर दांतों पर लगाने से सड़न की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
नीम को प्राकृतिक एंटी बैक्टीरियल माना जाता है, नीम की दातुन या नीम के पानी से कुल्ला करने से दांतों में मौजूद बैक्टीरिया कम होते हैं और संक्रमण से राहत मिलती है।
नारियल तेल से ऑयल पुलिंग दांतों के कोनों तक जाकर गंदगी साफ करने में मदद करती है, रोजाना 5 मिनट तक तेल घुमाने से दांतों का पीलापन भी कम हो सकता है।
नमक और सरसों के तेल का मिश्रण दांतों के दर्द में राहत देता है और बैक्टीरिया को नष्ट करता है, हफ्ते में तीन बार इस्तेमाल करने से दांत साफ और मजबूत बनते हैं।
घरेलू उपायों के साथ आहार में बदलाव भी जरूरी है, कैल्शियम और विटामिन डी दांतों को मजबूती देते हैं और मसूड़ों से खून आने की समस्या कम करते हैं।
इसके अलावा विटामिन सी भी दांतों के लिए फायदेमंद है, रोजाना किसी खट्टे फल का सेवन करने से मसूड़े स्वस्थ रहते हैं और दांत लंबे समय तक सुरक्षित बने रहते हैं।
