भारत के तकनीकी क्षेत्र के लगभग 97 प्रतिशत एचआर लीडर्स का मानना है कि वर्ष 2027 तक कामकाज का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा, इस दौरान ज्यादातर काम इंसान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई मिलकर करेंगे।
नैसकॉम और जॉब पोर्टल इंडीड की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार टेक कंपनियों में 20 से 40 प्रतिशत काम पहले ही एआई की मदद से हो रहा है, साथ ही 45 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बताया कि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का 40 प्रतिशत से अधिक कार्य अब एआई द्वारा किया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई अब केवल एक सहायक तकनीक नहीं रहा, बल्कि रोजमर्रा के कार्य, व्यावसायिक प्रक्रियाएं और निर्णय लेने की प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, इंटेलिजेंट ऑटोमेशन में 39 प्रतिशत और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट में 37 प्रतिशत योगदान तेजी से बढ़ रहा है।
हालांकि रिपोर्ट में आधे से ज्यादा एचआर प्रमुखों ने माना कि कई बार एआई द्वारा दिया गया परिणाम अधूरा या कम गुणवत्ता वाला होता है, इसलिए मानव निगरानी अभी भी बेहद जरूरी है।
नैसकॉम की शोध प्रमुख केतकी कर्णिक का कहना है कि जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ रहा है, कर्मचारियों के लिए नई स्किल्स सीखना और क्षमताओं को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है, इससे कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ेगी और कंपनियों को बेहतर नतीजे मिलेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दो से तीन वर्षों में बार-बार होने वाले साधारण कार्य जैसे बॉयलरप्लेट कोड जनरेशन और यूनिट टेस्ट तैयार करना ज्यादातर एआई के जरिए किया जाएगा, जबकि कार्यक्षेत्र निर्धारण, सिस्टम इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा मॉडल डिजाइन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में इंसान और एआई के बीच बेहतर तालमेल देखा जा रहा है।
भर्ती पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिल रहा है, अब कंपनियां डिग्री या सर्टिफिकेट की बजाय कौशल आधारित भर्ती को तरजीह दे रही हैं, 85 प्रतिशत प्रबंधक कौशल आधारित भर्ती को ज्यादा प्रभावी मानते हैं और 98 प्रतिशत प्रतिभागियों ने हाइब्रिड और बहु-विषयक कौशल की जरूरत पर जोर दिया है।
तकनीकी कंपनियां एआई अपनाने के लिए अपनी कार्यप्रणालियों और संरचना में बदलाव कर रही हैं, करीब 83 प्रतिशत एचआर प्रमुखों ने बताया कि कंपनियों ने एआई से जुड़े नए पद भी सृजित किए हैं, साथ ही 79 प्रतिशत संगठन कर्मचारी पुनर्प्रशिक्षण को सबसे अहम रणनीति मानते हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि करीब 80 प्रतिशत संगठन हाइब्रिड मॉडल अपना चुके हैं, जिसमें अधिकांश कर्मचारी हफ्ते में तीन या उससे ज्यादा दिन दफ्तर से काम कर रहे हैं, जबकि बाकी दिनों में घर से काम करने की व्यवस्था बनी हुई है।
