आयुर्वेद में घी को अमृत कहा गया है क्योंकि यह शरीर, मन और आत्मा के लिए अत्यंत पौष्टिक माना जाता है, भारतीय भोजन में सदियों से घी का उपयोग होता आया है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार घी केवल स्वाद बढ़ाने वाला पदार्थ नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए अमृत समान है, इसमें मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व आधुनिक जीवन की कई समस्याओं का समाधान प्रदान करते हैं।
आयुर्वेद कहता है कि सही समय, सही मात्रा और सही व्यक्ति के लिए घी अमृत समान है, नियमित सेवन से इम्युनिटी मजबूत होती है और मानसिक तनाव में कमी आती है।
आयुर्वेद के अनुसार घी पाचन अग्नि को तेज करता है, आंतों को चिकना रखता है और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है, वहीं विटामिन ए, डी, ई और के हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और जोड़ों के दर्द में राहत देते हैं।
तेज़ जीवनशैली और तनावपूर्ण दिनचर्या में घी दिमाग को शांत करता है, नींद में सुधार लाता है और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, साथ ही त्वचा और बालों के लिए भी घी अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
घी के नियमित सेवन से त्वचा नरम और चमकदार बनी रहती है, झुर्रियों और ड्राई स्किन जैसी समस्याओं में कमी आती है, घी के सत्वगुण सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं और शरीर से गंदगी को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार सुबह खाली पेट गुनगुने पानी या दूध में एक चम्मच घी मिलाकर पीना लाभदायक है, इसके अलावा दाल, सब्जी, रोटी या खिचड़ी में घी डालकर भी सेवन किया जा सकता है।
रात में गर्म दूध के साथ घी लेने से तनाव कम होता है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, हेल्थ विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य व्यक्ति के लिए रोजाना 1 से 2 चम्मच घी पर्याप्त है।
अधिक मात्रा में घी का सेवन कफ बढ़ा सकता है इसलिए संतुलन आवश्यक है, विशेषज्ञों के अनुसार देसी गाय का घी सबसे उत्तम माना जाता है।
