“राहुल का जन्म, कांग्रेस का मरण!”

राहुल गांधी का जन्म 1970 में हुआ, परन्तु कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उसी दिन कांग्रेस पार्टी ने भी जन्म से अधिक जर्जरता की ओर पहला कदम बढ़ा दिया था। डॉक्टरों की चेतावनी भी कोई मामूली बात नहीं थी। आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो लगता है कि डॉक्टर भविष्यद्रष्टा निकले।


🧠 बालक राहुल और बाल कांग्रेस में समानता:

जैसे जैसे राहुल जी बड़े हुए, कांग्रेस पार्टी छोटी होती गई। एक दौर वो था जब कांग्रेस पूरे देश पर राज करती थी, और अब वो दौर है जब जनता सिर्फ सोशल मीडिया पर कांग्रेस को ट्रेंड करवा देती है — वो भी मीम्स के माध्यम से।


🎭 अस्पताल से लेकर संसद तक – व्यंग्य का सफर

कहते हैं राहुल गांधी का राजनीतिक प्रशिक्षण अस्पताल से ही शुरू हो गया था। तभी से उन्होंने ‘बोलना ज़रूर है, पर क्या बोलना है, ये बाद में सोचना है’ वाली शैली को अपना लिया।

आज वही कांग्रेस पार्टी ICU से बाहर आने की कोशिश कर रही है, लेकिन हर बार राहुल बाबा एक नई ‘ट्यूब’ निकाल देते हैं — कभी “मोहब्बत की दुकान”, कभी “टैंक में आलू डालो सोना मिलेगा”, तो कभी “भारत जोड़ो, लेकिन कांग्रेस छोड़ो” यात्रा।


📉 डॉक्टरों का नुस्खा अब भी वही है:

“मां और बेटा ठीक हैं… लेकिन कांग्रेस को अब भी आइडियोलॉजिकल वेंटिलेटर पर रखने की ज़रूरत है।”


राहुल गांधी के जन्म का दिन एक भावनात्मक क्षण था — घर में बच्चा आया, देश में संकट आया। डॉक्टरों की बात को तब किसी ने गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन अब सोशल मीडिया के ज़माने में हर किसी को लगता है —
“डॉक्टर सही थे… कांग्रेस को बचाना वाकई सबसे मुश्किल डिलीवरी है।”