ताइवान को लेकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की टिप्पणी के बाद चीन ने अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने इस अभ्यास को जस्टिस मिशन 2025 नाम दिया है, जिसके तहत ताइवान के आसपास थल सेना, वायु सेना और तोपखाने की यूनिट्स को तैनात किया गया है, साथ ही लाइव फायर ड्रिल की भी तैयारी की जा रही है।
चीनी सेना के अनुसार शुरुआती अभ्यास शुरू हो चुके हैं, जबकि मुख्य सैन्य अभ्यास स्थानीय समयानुसार सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक चलेंगे, इसमें एयर, नेवल और आर्टिलरी ऑपरेशंस शामिल होंगे।
2022 के बाद यह चीन का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास माना जा रहा है, जिसमें ताइवान के चारों ओर फोर्स की तैनाती, समुद्री ब्लॉकेड और लाइव फायर ड्रिल जैसे आक्रामक कदम शामिल हैं, जिससे चीन की रणनीतिक मंशा साफ झलकती है।
इस सैन्य गतिविधि पर ताइवान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने इसे बिना वजह उकसावे की कार्रवाई बताते हुए कहा कि सेना हाई अलर्ट पर है और रैपिड रिस्पॉन्स एक्सरसाइज जारी है।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक सोमवार सुबह दो पीएलए एयरक्राफ्ट सॉर्टी, नौ पीएलए जहाज और दो सरकारी जहाज ताइवान के आसपास सक्रिय देखे गए, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई।
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने भी चीन की इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि वह अपने सैनिकों के साथ मजबूती से खड़ा है और लोकतांत्रिक साझेदारों के साथ मिलकर क्षेत्रीय शांति की रक्षा करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल ही में अमेरिका और ताइवान के बीच हुए 11 बिलियन डॉलर के हथियार सौदे के बाद चीन की नाराजगी और बढ़ गई है, इसी के जवाब में चीन ने यह बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया है।
क्षेत्रीय विश्लेषकों के अनुसार चीन का यह कदम न केवल ताइवान बल्कि जापान और अमेरिका के लिए भी एक सख्त संदेश है, जिससे आने वाले दिनों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
