सरकार ने बुधवार को जानकारी दी कि पिछले कुछ महीनों में 40 लाख से ज्यादा फास्टैग एनुअल पास बिक चुके हैं, लगभग 20 प्रतिशत कार चालक इस पास का उपयोग कर रहे हैं, इससे स्पष्ट है कि सुविधा और सामर्थ्य दोनों एक साथ संभव हैं।
यह वार्षिक फास्टैग पास 15 अगस्त 2025 को लॉन्च किया गया था, इसके तहत कोई भी व्यक्ति 3,000 रुपए देकर या तो 200 बार टोल पार कर सकता है या एक वर्ष तक यात्रा कर सकता है, यह सुविधा देश के 1,159 टोल प्लाजा पर लागू है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, रोजाना हाईवे पर यात्रा करने वालों को इस पास से बड़ी राहत मिली है, कई लोगों के लिए यह पास यात्रा का खर्च कम करने और सफर को आसान बनाने में मददगार साबित हुआ है।
हरियाणा के यमुनानगर के एक व्यक्ति ने बताया कि उन्हें अक्सर चंडीगढ़ जाना पड़ता है, पहले एक बार आने-जाने में 150 रुपए खर्च होते थे, वार्षिक पास लेने के बाद वही काम अब सिर्फ 30 रुपए में हो जाता है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।
सरकार ने कहा कि वार्षिक पास ने हर महीने बदलने वाले टोल खर्च को तय कर दिया है, इससे रोज यात्रा करने वालों को पैसे की बचत, तय खर्च और बिना परेशानी के सफर का फायदा मिल रहा है, अब उन्हें फास्टैग रिचार्ज की चिंता भी नहीं रहती।
मंत्रालय ने बताया कि 15 नवंबर से 10 दिसंबर 2025 के बीच टोल प्लाजा पर 15 लाख से ज्यादा यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए, जिनकी कुल राशि 19.44 करोड़ रुपए रही, इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला है।
नकद भुगतान में 25 प्रतिशत की कमी आई है, इससे टोल प्लाजा पर भीड़ घटी है और व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी बनी है, फिलहाल 98 प्रतिशत वाहन फास्टैग का उपयोग कर रहे हैं और बाकी वाहन भी धीरे-धीरे इस सिस्टम से जुड़ रहे हैं।
सरकार ने कहा कि फास्टैग को बढ़ावा सिर्फ जुर्माने से नहीं बल्कि लोगों को फायदेमंद और आसान सुविधा देकर किया जा रहा है, लोगों के लिए यह बदलाव अधिक व्यावहारिक और लाभकारी साबित हो रहा है।
मंत्रालय ने बताया कि अगर किसी सड़क को 2 लेन से 4, 6 या ज्यादा लेन में अपग्रेड किया जा रहा है, तो काम पूरा होने तक यात्रियों से सिर्फ 50 प्रतिशत टोल लिया जाएगा, इस निर्णय से लोगों पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।
