भारत में सोना और आभूषण आज भी संपत्ति बनाने का एक मजबूत जरिया बने हुए हैं, डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 86 प्रतिशत लोग ज्वेलरी को निवेश का अच्छा साधन मानते हैं, जो म्यूचुअल फंड और शेयर जैसे विकल्पों के करीब है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का ज्वेलरी बाजार तेजी से बदल रहा है, अब लोग गहनों को सिर्फ शादी और परंपरा से नहीं जोड़ते बल्कि अपनी पहचान, जीवनशैली और रोजमर्रा के पहनावे का हिस्सा भी मानते हैं।
डेलॉइट इंडिया के मुताबिक 56 प्रतिशत उपभोक्ता ज्वेलरी को निवेश और फैशन दोनों के रूप में देखते हैं, जबकि 28 प्रतिशत लोग केवल निवेश के उद्देश्य से गहने खरीदते हैं, जिससे आभूषणों की भूमिका में बड़ा बदलाव दिखता है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पुरुष और 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग गहनों को मुख्य रूप से निवेश के नजरिए से खरीदते हैं, वहीं युवा वर्ग डिजाइन, कस्टमाइजेशन और पहनने की सुविधा को ज्यादा महत्व देता है।
जेनजी और युवा पीढ़ी में हल्के और रोज पहनने वाले गहनों का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जहां 51 प्रतिशत जेनजी को चांदी और 34 प्रतिशत को प्लेटिनम ज्वेलरी पसंद है।
रिपोर्ट के अनुसार करीब 49 प्रतिशत उपभोक्ता भारी और पारंपरिक गहनों की बजाय हल्के और सादे आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो बदलते फैशन ट्रेंड को दर्शाता है।
डेलॉइट इंडिया ने बताया कि 45 प्रतिशत जेनजी और युवा वर्ग सिल्वर ज्वेलरी में निवेश करना पसंद करता है, जिसकी वजह बेहतर डिजाइन, कम कीमत और आसानी से उपलब्धता मानी जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले भारत में लगभग 70 प्रतिशत गहने शादियों के लिए खरीदे जाते थे, लेकिन अब युवा जन्मदिन, सालगिरह, रोजाना पहनने और करियर से जुड़ी उपलब्धियों पर आभूषण खरीद रहे हैं।
करीब 49 प्रतिशत लोग अंगूठी, चेन और कान की बालियां जैसे गहनों को निजी और गैर-धार्मिक अवसरों के लिए पसंद करते हैं, जो पारंपरिक भारी गहनों से अलग रुझान दिखाता है।
हालांकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का प्रभाव बढ़ा है, लेकिन गहनों के मामले में लोग अब भी दुकान पर जाकर खरीदारी को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं, रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में ज्वेलरी उद्योग में भरोसा और बेहतर सेवाएं सबसे अहम होंगी।
