मकर संक्रांति पर देशभर के मंदिरों में भव्य भोग और परंपराएं

मकर संक्रांति का त्योहार भारत के अलग-अलग मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर बेहद अनूठे और भव्य तरीके से मनाया जाता है, दक्षिण भारत में इसे पोंगल के रूप में चार दिनों तक सूर्य पूजा और कृषि उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।

पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में मकर संक्रांति पर विशेष वेशभूषा से लेकर 84 प्रकार के व्यंजन भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए जाते हैं, इस पारंपरिक प्रसाद को मकर चौरासी भोग कहा जाता है।

इसमें चावल, गुड़, केला, नारियल, बड़ी, झिली, गजा, काकेरा, अमलू, फल और विविध मिठाइयां शामिल होती हैं, इसके अलावा अरिसा पीठा भी भगवान को अर्पित किया जाता है जो चावल और गुड़ से तैयार होता है।

मकर संक्रांति पर जगन्नाथ मंदिर में चार अलग-अलग समय पर अलग-अलग भोग लगाए जाते हैं, इसे अत्यंत शुभ माना जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं।

दक्षिण भारत के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा को विशेष आभूषणों से सजाया जाता है, यहां अरवाणा पायसम और अप्पम का भोग लगता है जो चावल, घी और गुड़ से बनाए जाने वाले पारंपरिक व्यंजन हैं।

अरवाणा पायसम हलवे की तरह गाढ़ा और मीठा होता है, जबकि अप्पम गुड़ और चावल के मिश्रण से बनाया जाता है और भगवान अयप्पा का प्रिय प्रसाद माना जाता है।

उत्तर भारत में गोरखनाथ मंदिर में तिल, गुड़ और चावल-उड़द की दाल से बनी खिचड़ी का भोग लगाया जाता है, मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान और सेवन सदियों पुरानी परंपरा है।

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ को मौसमी सब्जियों वाली खिचड़ी अर्पित की जाती है, यह उदड़ दाल की पारंपरिक खिचड़ी से भिन्न होती है और इसके साथ तिल-गुड़ की मिठाइयां भी अर्पित की जाती हैं।

गुजरात के सोमनाथ और द्वारकाधीश मंदिर में भगवान शिव और विष्णु को 56 भोग अर्पित किए जाते हैं, इसके साथ ऊंधियू और जलेबी का विशेष भोग भी लगता है।

ऊंधियू में छह से आठ तरह की सब्जियों का उपयोग किया जाता है और इसे सर्दियों में अत्यंत पौष्टिक माना जाता है, इसके अलावा सात अनाज वाली खिचड़ी, तिल-मूंगफली की चिक्की और तिल के लड्डू भी अर्पित किए जाते हैं।

देशभर में विविध परंपराओं, विशेष भोग और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के साथ मकर संक्रांति सूर्य पूजा और उत्सव का अनूठा संगम बन जाती है।