भारत का पहला पूरी तरह लदा वीएलसीसी मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा

गुरुवार को भारत के समुद्री इतिहास में नया अध्याय जुड़ा, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने देश के पहले पूर्णतः लदे वीएलसीसी जहाज का स्वागत किया, इस उपलब्धि से मुंद्रा पोर्ट अंतरराष्ट्रीय क्रूड लॉजिस्टिक्स के वैश्विक नक्शे पर प्रमुखता से उभरा।

Mount New Renown नामक इस जहाज की माल ढुलाई क्षमता 3.3 लाख घन मीटर है, जहाज के बर्थ पर सफल डॉकिंग के साथ मुंद्रा भारत का पहला बंदरगाह बना जो पूर्णतः भरे वीएलसीसी को संभालने में सक्षम हुआ।

कंपनी के अनुसार तेज हवाओं, समुद्री लहरों और धाराओं जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालन सफलता से किया गया, यह APSEZ की समुद्री टीम और पोर्ट प्रबंधन की तकनीकी दक्षता और समन्वय की पुष्टि करता है।

मुंद्रा का वीएलसीसी जेटी 489 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से बाड़मेर स्थित HPCL राजस्थान रिफाइनरी से जुड़ा है, यह कनेक्टिविटी भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और कच्चे तेल आयात की दक्षता को बढ़ाती है।

कंपनी का कहना है कि पूर्ण लदे वीएलसीसी जहाजों की डायरेक्ट जेटी बर्थिंग सुविधा दुनिया भर के केवल चुनिंदा बंदरगाहों पर उपलब्ध है, इन जहाजों की ड्राफ्ट और बुनियादी ढांचे की आवश्यकताएँ अत्यधिक होती हैं जिस कारण यह सुविधा सीमित है।

इस उपलब्धि के साथ मुंद्रा बंदरगाह अब वैश्विक स्तर पर प्रमुख क्रूड संचालन हब की सूची में शामिल हुआ, पोर्ट की उन्नत संचालन क्षमता से अब ऑफशोर SPM या लाइटरिंग जैसे पारंपरिक विकल्पों पर निर्भरता समाप्त होगी।

कंपनी के मुताबिक सीधे जेटी संचालन से कच्चे तेल की हैंडलिंग तेज, सुरक्षित और अधिक लागत प्रभावी होगी, इससे गुजरात और राजस्थान में क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

अदाणी समूह ने बताया कि मुंद्रा पोर्ट वर्ष 2024-25 में 200 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कार्गो हैंडल करने वाला भारत का पहला पोर्ट बना, यह उपलब्धि इसकी परिचालन क्षमता और अवसंरचना दक्षता को रेखांकित करती है।