सरकार ने एक नया आधार मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य पहचान की जांच को तेज, सुरक्षित और आम लोगों के लिए आसान बनाना है, इस ऐप के जरिए डिजिटल पहचान को मोबाइल में ही सुरक्षित रखा जा सकेगा।
नए ऐप की मदद से यूजर को आधार कार्ड की हार्ड कॉपी दिखाने या फोटोकॉपी देने की जरूरत नहीं होगी, यूजर केवल वही जानकारी साझा कर सकेगा जो किसी विशेष सेवा के लिए आवश्यक हो।
सरकारी बयान के अनुसार इससे एयरपोर्ट, होटल, अस्पताल और विभिन्न सेवा प्लेटफॉर्म पर पहचान सत्यापन की प्रक्रिया तेज और सरल हो जाएगी, जिससे समय और कागजी झंझट दोनों कम होंगे।
इस ऐप की प्रमुख विशेषता क्यूआर कोड के जरिए ऑफलाइन आधार वेरिफिकेशन है, जिससे होटल चेक-इन जैसी स्थितियों में बिना इंटरनेट भी पहचान की पुष्टि संभव होगी।
इसके अलावा ऐप में फेस वेरिफिकेशन और उम्र सत्यापन जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जिनका उपयोग मूवी टिकट बुकिंग और अन्य सेवाओं में किया जा सकेगा।
सरकार ने बताया कि ऐप को हर तरह के यूजर को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, इसमें अस्पतालों में विजिटर एंट्री, गिग वर्कर्स और सर्विस पार्टनर्स की पहचान जांच की सुविधा भी शामिल है।
यूजर इस ऐप से अपने आधार बायोमेट्रिक डेटा को एक क्लिक में लॉक या अनलॉक कर सकता है, साथ ही आधार ऑथेंटिकेशन से जुड़ी पूरी हिस्ट्री भी देख सकता है।
‘वन फैमिली-वन ऐप’ फीचर के तहत एक ही मोबाइल फोन में पांच आधार प्रोफाइल तक मैनेज किए जा सकेंगे, जिससे परिवार के सदस्यों का डेटा संभालना आसान होगा।
अब इस ऐप के जरिए आधार में दर्ज मोबाइल नंबर अपडेट करने की सुविधा भी दी गई है, जिससे छोटे बदलावों के लिए आधार केंद्र या बैंक जाने की जरूरत कम हो जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐप के जरिए साझा की गई जानकारी को वेरिफिकेशन एजेंसियां स्टोर नहीं करेंगी, केवल डिजिटल रूप से साइन और वेरिफाइड डेटा ही साझा किया जाएगा।
यह व्यवस्था डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून के अनुरूप है और इससे डेटा के गलत इस्तेमाल की आशंका कम होगी।
यह नया आधार मोबाइल ऐप भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा विकसित किया गया है, जिसे वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लॉन्च किया।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि यह ऐप न्यूनतम डेटा साझा करने की सोच को बढ़ावा देगा और आधार धारकों को अपनी जानकारी सुरक्षित तरीके से चुनकर साझा करने की सुविधा देगा।
यूआईडीएआई अधिकारियों के अनुसार कागज आधारित प्रक्रिया से पूरी तरह डिजिटल सिस्टम की ओर यह एक बड़ा कदम है, जिसमें कस्टमाइज्ड क्यूआर कोड के जरिए जरूरत के अनुसार ही जानकारी साझा की जा सकेगी।
