भारत में क्रिसमस का त्योहार हर साल उत्साह और सौहार्द के साथ मनाया जाता है, भले ही यह ईसाइयों का पर्व हो लेकिन इसमें सभी समुदायों की भागीदारी देखने को मिलती है।
इस साल क्रिसमस के दौरान देश के कुछ हिस्सों से तोड़-फोड़ की घटनाएं सामने आईं, जिन पर पाकिस्तान की ओर से भारत को नसीहत दी गई, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित घटनाओं पर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ध्यान देने की अपील की।
प्रेस रिलीज में कहा गया कि क्रिसमस के दौरान हुई घटनाओं और मुसलमानों को निशाना बनाने वाले कथित अभियानों से भारत में डर का माहौल बन रहा है।
भारत को यह ज्ञान ऐसे देश से मिला है, जहां खुद अल्पसंख्यकों की स्थिति लंबे समय से सवालों के घेरे में रही है और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टें लगातार चिंता जताती रही हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय ने मार्च में बयान जारी कर कहा था कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को डराने, अपहरण करने, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन शादी की घटनाएं लगातार सामने आती हैं।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान में हर साल करीब एक हजार हिंदू और ईसाई लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले दर्ज होते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक 2022 में 124 हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह के मामले सामने आए, जबकि 2019 से 2025 के बीच 334 गंभीर हिंसा और हत्या की घटनाएं दर्ज की गईं।
पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में हिंदुओं की आबादी लगभग 2.5 मिलियन बताई गई, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पसंख्यक अधिकारों पर बयान देने से पहले पाकिस्तान को अपने देश की जमीनी हकीकत पर गंभीर आत्ममंथन करने की जरूरत है।
