रैपिडो, जो कि देश भर में बाइक और ऑटो राइड-हीलिंग सेवा के रूप में लोकप्रिय है, पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही ग्राहकों को ₹50 के कैशबैक का नगद रिफंड देने और भ्रमक विज्ञापनों को बंद करने का आदेश भी दिया गया है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब कंपनी के खिलाफ बढ़ती शिकायतों ने उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण का ध्यान खींचा।
ग्राहकों से मिली शिकायतें और कंपनी की नीतियां
रैपिडो का विज्ञापन अभियान हमेशा से आकर्षक रहा है, जैसे “5 मिनट में ऑटो” और “₹50 का कैशबैक” जैसे वादों ने लाखों ग्राहकों को लुभाया। हालांकि, सीसीपीए की जांच में यह सामने आया कि कंपनी के विज्ञापन में भ्रमक जानकारी दी गई थी। ग्राहकों को ₹50 का कैशबैक देने का वादा तो किया गया, लेकिन यह नगद में नहीं, बल्कि रैपिडो कॉइंस के रूप में दिया गया था, जिनकी वैधता केवल 7 दिन थी। अगर ग्राहक इस अवधि में इन कॉइंस का इस्तेमाल नहीं करते तो उनका कैशबैक अप्रभावी हो जाता। इसके अलावा, कई शिकायतें ग्राहकों ने रैपिडो के ड्राइवरों के बुरे व्यवहार, रिफंड न मिलने और कैशबैक के वादों के पूरे न होने को लेकर की थीं।
सीसीपीए ने रैपिडो को एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया और कंपनी से यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि वह ग्राहकों को ₹50 का रिफंड दे। साथ ही, कंपनी को भ्रमक विज्ञापनों को बंद करने और 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया।
ड्राइवरों की परेशानियाँ और कंपनी की उच्च कमीशन नीति
रैपिडो की नीतियों से सिर्फ ग्राहकों को ही नहीं, बल्कि कंपनी के ड्राइवरों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां कंपनी ग्राहकों को सस्ती सवारी का वादा करती है, वहीं दूसरी ओर ड्राइवरों पर भारी कमीशन का बोझ डालती है। रैपिडो प्रति राउंड ड्राइवरों से 20-30% तक कमीशन वसूल करती है। इसके अलावा, ड्राइवरों को ईंधन, वाहन रखरखाव और अन्य खर्चे खुद उठाने पड़ते हैं।
एक ड्राइवर ने बताया, “कंपनी इतना कमीशन लेती है कि दिनभर की मेहनत के बाद भी हमारी जेब खाली रहती है। अगर हम ग्राहक से ₹50 अतिरिक्त नहीं लेते तो हमारी कमाई पर और घाटा हो सकता है।” यही कारण है कि ड्राइवरों को छोटे-छोटे शुल्कों के लिए ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे मांगने पड़ते हैं, जिसके बाद ग्राहकों की शिकायतें आती हैं और ड्राइवरों पर दबाव बनता है।
रैपिडो की गलती और सीसीपीए का कदम
रैपिडो की सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने ग्राहकों और ड्राइवरों के बीच संतुलन बनाने में असफल रही। कंपनी ने ग्राहकों को आकर्षक वादों के जरिए लुभाया, लेकिन उन वादों को पूरा करने में नाकाम रही। कैशबैक के रूप में दिए गए रैपिडो कॉइंस और ड्राइवरों से लिया गया भारी कमीशन दोनों ने ग्राहकों और ड्राइवरों को निराश किया।
सीसीपीए का यह कदम रैपिडो के लिए एक बड़ा संदेश है कि ग्राहक और ड्राइवर दोनों के साथ उचित व्यवहार करना जरूरी है। यदि रैपिडो अपनी नीतियों में सुधार नहीं करती तो उसकी लोकप्रियता को गंभीर खतरा हो सकता है।
क्या यह सुधार होगा?
अब यह देखने वाली बात होगी कि क्या रैपिडो अपनी नीतियों में सुधार करेगी या फिर यह जुर्माना और रिफंड का आदेश सिर्फ एक औपचारिक कार्रवाई बनकर रह जाएगा। क्या रैपिडो इस घटनाक्रम से सीखते हुए ग्राहकों और ड्राइवरों के बीच संतुलन बनाएगी? यह सवाल आने वाले समय में सामने आएगा।
आपकी राय क्या है?
क्या आप भी रैपिडो या अन्य राइड-हेलिंग सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं? क्या आपने भी कभी ऐसी समस्याएं फेस की हैं? क्या आपके साथ भी ड्राइवरों ने अतिरिक्त शुल्क मांगा है? अपनी राय और अनुभव कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।