रील्स की लत से बढ़ रहे सर्वाइकल और गर्दन दर्द के मामले

रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने का ट्रेंड युवाओं से लेकर बच्चों तक तेजी से बढ़ रहा है, मोबाइल स्क्रीन पर घंटों नजर टिकाए रखने से गर्दन और रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, डॉक्टर इसे आधुनिक जीवनशैली का उभरता स्वास्थ्य जोखिम बता रहे हैं।

मेडिकल विशेषज्ञ बताते हैं कि सिर के आगे झुके रहने की स्थिति में सामान्य पांच किलो भार की तुलना में कई गुना तनाव बढ़ जाता है, ऐसे में गर्दन की मांसपेशियां और नसें लगातार दबाव में रहती हैं, यही दबाव धीरे-धीरे सर्वाइकल स्पाइन डिसऑर्डर का कारण बन सकता है।

कई मामलों में मरीज शुरुआत में हल्का दर्द या जकड़न महसूस करते हैं, इसे थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय के साथ दर्द कंधों और हाथों तक फैल जाता है, जिसमें झनझनाहट और कमजोरी जैसे लक्षण भी शामिल होते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि रील्स देखने की आदत केवल गर्दन को नहीं बल्कि आंखों और दिमाग को भी प्रभावित करती है, लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में जलन और धुंधलापन बढ़ता है, वहीं दिमाग लगातार सक्रिय रहने से तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि गलत पोजीशन में लंबे समय तक बैठने से रीढ़ की प्राकृतिक संरचना पर असर पड़ता है, इससे सर्वाइकल स्पाइन कमजोर होती है, आगे चलकर यह समस्या स्थायी भी हो सकती है, जिसके लिए दवाएं और फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्क्रीन टाइम को सीमित किया जाए, मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखा जाए, हर बीस मिनट में गर्दन को हल्का मूवमेंट दिया जाए, साथ ही बच्चों को रील्स देखने की आदत से बचाने की जरूरत है ताकि भविष्य में सर्वाइकल जैसी समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सके।