प्राणायाम को जीवन शक्ति के नियंत्रण और विस्तार का महत्वपूर्ण साधन माना गया है, यह न केवल श्वास को नियंत्रित करता है बल्कि नाड़ी तंत्र को संतुलित करने में भी अहम भूमिका निभाता है।
इसी क्रम में सूर्यभेदी प्राणायाम को विशेष महत्व दिया गया है, जो शरीर के अंदरूनी ताप को तेजी से बढ़ाने और ऊर्जा को सक्रिय करने का कार्य करता है।
‘सूर्य’ का अर्थ सूर्य यानी गर्मी और ऊर्जा का प्रतीक तथा ‘भेदन’ का अर्थ जागृत करना है, इस प्राणायाम में दाहिनी नासिका के माध्यम से श्वास लेकर सूर्य तत्व को सक्रिय किया जाता है।
हठयोग प्रदीपिका और अन्य प्राचीन योग ग्रंथों में सूर्यभेदन प्राणायाम को आठ प्रमुख कुम्भकों में से एक माना गया है, जिससे इसकी प्राचीनता और उपयोगिता स्पष्ट होती है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार सूर्यभेदन प्राणायाम शरीर को गर्म रखने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और ठंड के कारण होने वाली जकड़न को दूर करने में प्रभावी माना जाता है।
इस प्राणायाम में दाहिनी नासिका से सांस लेकर बाईं नासिका से छोड़ी जाती है, खासतौर पर सर्दियों के मौसम में इसे करने की विशेष सलाह दी जाती है।
हालांकि उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सूर्यभेदन प्राणायाम करने से पहले सावधानी बरतने या इससे बचने की सलाह दी जाती है।
सूर्यभेदन प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले सुखासन, पद्मासन या किसी आरामदायक मुद्रा में बैठना चाहिए, जिससे शरीर स्थिर और सहज स्थिति में रहे।
इसके बाद बाईं नासिका को अंगूठे से बंद कर दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे गहरी सांस लें, सांस भरने के बाद दोनों नासिकाएं बंद कर कुछ क्षण तक रोकें।
अब बाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें, इसे एक चक्र माना जाता है और सुबह के समय खाली पेट रोजाना 10 से 15 चक्र करने की सलाह दी जाती है।
योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से सर्दी-जुकाम, नाक बंद होना और ठंड से जुड़ी समस्याओं में काफी राहत मिलती है।
आयुर्वेद के अनुसार सूर्यभेदन प्राणायाम शरीर में पिंगला नाड़ी को सक्रिय करता है और आंतरिक ऊष्मा यानी अग्नि को बढ़ाता है।
यह प्राणायाम पाचन तंत्र को मजबूत करने, प्रतिरक्षा बढ़ाने और मानसिक एकाग्रता के साथ जीवन शक्ति को जागृत करने में सहायक माना जाता है।
विशेष रूप से कफ दोष यानी सर्दी और खांसी से जुड़ी समस्याओं में यह प्राणायाम लाभकारी बताया गया है।
सूर्यभेदन प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और शरीर को ऊर्जावान, सक्रिय और चुस्त बनाए रखने में मदद करता है।
