भारत पर टैरिफ धमकी और चीन-ताइवान पर बोले जॉन बोल्टन

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई के बाद भारत पर एक बार फिर टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की आगे की रणनीति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस घटनाक्रम के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या ट्रंप दुनिया के अन्य देशों के साथ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई कर सकते हैं, और क्या अमेरिका के नक्शे कदम पर चलते हुए चीन ताइवान पर कब्जा करने जैसी कोशिश कर सकता है।

इस पूरे मुद्दे पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में ट्रंप की भारत को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है।

जॉन बोल्टन ने कहा कि बातचीत पूरी होने से पहले ही भारत के खिलाफ टैरिफ की घोषणा करना दुर्भाग्यपूर्ण है, और इसी तरह चीन, तुर्किये या किसी अन्य देश पर रूसी तेल खरीदने को लेकर टैरिफ लगाने की बात भी सही नहीं कही जा सकती।

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते फिर से करीबी होने चाहिए, क्योंकि चीन की दबदबे की चाहत को लेकर दोनों देशों के हित आपस में जुड़े हुए हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रंप अन्य देशों के साथ भी वेनेजुएला जैसी कार्रवाई कर सकते हैं, बोल्टन ने कहा कि वेनेजुएला की स्थिति को उसके विशेष हालात में देखना चाहिए।

पूर्व एनएसए ने कहा कि वेनेजुएला में 2024 का चुनाव मादुरो ने कथित रूप से धांधली से जीता, और विपक्षी नेता मारिया कैरिना मचाडो ने उन्हें सत्ता में बने रहने से रोकने के प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार जीता।

उन्होंने इस स्थिति की तुलना वर्ष 1990 के पनामा संकट से की, जब चुने गए राष्ट्रपति गुइलेर्मो अंडारा ने तानाशाह मैनुअल नोरिएगा के खिलाफ अमेरिका से हस्तक्षेप की मांग की थी।

जॉन बोल्टन ने कहा कि किसी नाजायज नेता को पकड़ना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ नहीं होता, खासकर तब जब उसके कदम अमेरिका की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बन रहे हों।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल वेनेजुएला की स्थिति के आधार पर रूस के यूक्रेन पर हमले को सही नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि वह बिना किसी उकसावे के किया गया आक्रमण था।

इसी तरह बोल्टन ने कहा कि चीन द्वारा ताइवान पर हमले को भी उन्हीं तर्कों के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा कि चीन लंबे समय से ताइवान को धमका रहा है, जबकि ताइवान के लोगों ने बार बार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों में यह स्पष्ट किया है कि वे मेनलैंड चीन में शामिल नहीं होना चाहते।

पूर्व एनएसए के अनुसार ताइवान एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार है, और वहां के लोगों को खुद पर शासन करने का पूरा अधिकार है।

बोल्टन ने कहा कि चीन की ये धमकियां अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए वास्तविक खतरा हैं, जिन्हें हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

वहीं वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की टिप्पणी पर बोल्टन ने कहा कि यह अमेरिका में ट्रोलिंग कहलाता है, और यह ट्रंप के मोलभाव करने का तरीका है।

उन्होंने कहा कि कुछ अजीब बयान देकर लोगों को चौंकाना और फिर अपेक्षा से कम हासिल कर खुश हो जाना ट्रंप की रणनीति का हिस्सा है।

जॉन बोल्टन ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की कल्पना भी नहीं की जा सकती, क्योंकि ऐसा हुआ तो यह नाटो गठबंधन के अंत और अमेरिका के लिए एक बड़ी आपदा साबित हो सकता है।