किडनी की खराबी का शुरुआती पता अक्सर यूरिन के बदलावों से चलता है, यह एक ऐसा संकेत है जो शरीर में किडनी के धीरे-धीरे प्रभावित होने की चेतावनी देता है।
पेशाब में झाग बनना किडनी खराबी का सबसे आम लक्षण माना जाता है, अगर किडनी ठीक से काम नहीं कर रही हों तो प्रोटीन का फिल्टरेशन सही नहीं होता और वह यूरिन में शामिल होकर झाग पैदा करता है।
ऐसे मामलों में झाग ज्यादा और लगातार दिखाई दे तो यह संकेत हो सकता है कि किडनी का फिल्टर सिस्टम कमजोर हो रहा है, हालांकि हर झाग बीमारी का संकेत नहीं होता क्योंकि बुखार, डिहाइड्रेशन या तेज एक्सरसाइज के दौरान भी यह दिखाई देता है।
किडनी खराबी की शुरुआती जांच के लिए यूरिन डिपस्टिक टेस्ट आसान विकल्प माना जाता है, यह टेस्ट यूरिन में प्रोटीन की उपस्थिति का संकेत देता है और घर पर भी किया जा सकता है, लेकिन यह प्रोटीन की सटीक मात्रा और एल्ब्यूमिन स्तर की पूरी जानकारी नहीं देता।
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित मरीजों के लिए यह टेस्ट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन मरीजों में किडनी डैमेज की संभावना अधिक होती है।
किडनी की स्थिति का अंदाजा यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनाइन रेशियो (UACR) से भी लगाया जाता है, अगर यह लगातार बढ़ा हुआ मिले तो इसे बीमारी की चेतावनी माना जाता है।
झागदार पेशाब के साथ सूजन, बढ़ता क्रिएटिनाइन, बदलता ब्लड प्रेशर या यूरिन में खून भी दिखाई दे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए, ये संकेत किडनी को तत्काल ध्यान की जरूरत का इशारा करते हैं।
पेशाब में रंग, झाग, गंध और बनावट के बदलावों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है, शुरुआती लक्षणों को समझकर समय पर जांच कराने से बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ा जा सकता है।
किडनी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पानी का सेवन, संतुलित भोजन, कम नमक और तेल का उपयोग और नियमित स्वास्थ्य जांच को अहम माना जाता है, इन उपायों से बीमारी की प्रगति को धीमा करने में मदद मिलती है।
