शनिवार को हनुमान चालीसा पाठ से शनि दोष में राहत

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है, शास्त्रों के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में साढ़ेसाती ढैय्या या शनि दोष होता है उन्हें मानसिक तनाव आर्थिक रुकावट और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसी मान्यता है कि शनिवार को विशेष पूजा पाठ और हनुमान चालीसा का पाठ शनि दोष के प्रभाव को शांत करने में सहायक होता है, शास्त्रों में कहा गया है कि श्रद्धा से किया गया पाठ शनि के कष्टों को कम करने में लाभ पहुंचाता है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार शनिवार के साथ मंगलवार का दिन भी हनुमान जी को समर्पित माना गया है, मान्यता है कि हनुमान उपासना से नकारात्मक ग्रह प्रभाव कमजोर पड़ते हैं और शनि दोष से राहत मिलती है।

पुराणों और कथाओं में कहा गया है कि लंका में माता सीता की खोज के दौरान हनुमान ने रावण द्वारा बंदी बनाए गए शनिदेव को मुक्त कराया था, इससे प्रसन्न होकर शनिदेव ने हनुमान को वरदान दिया कि उनकी आराधना करने वाले भक्तों को शनि कष्टों का सामना कम करना पड़ेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि दोष के दौरान जीवन में रुकावटें बढ़ सकती हैं, कार्यक्षेत्र में बाधाएं धन संबंधी दिक्कतें पारिवारिक तनाव और मानसिक अशांति जैसे परिणाम दिखाई दे सकते हैं, इस कारण शनिवार को हनुमान चालीसा या सुंदरकांड पाठ की प्रथा प्रचलित है।

शनिवार की पूजा विधि में सुबह स्नान कर स्वच्छ होकर शांत मन से भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्वलित कर चालीसा पाठ किया जाता है, मान्यता है कि सात ग्यारह या उससे अधिक बार पाठ करने से शनि के दुष्प्रभाव में कमी आती है।

आस्था रखने वालों का विश्वास है कि शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक बेचैनी कम होती है, साथ ही शनि दोष साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव भी कमजोर पड़ता है।

धार्मिक विश्वास के अनुसार बजरंगबली की कृपा से व्यक्ति का साहस आत्मबल और निर्णय क्षमता बढ़ती है, नौकरी परीक्षा कानूनी मामलों और जीवन की चुनौतियों में भी यह पाठ सकारात्मक परिणाम देने वाला बताया गया है।