सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने सरकार से आगामी बजट में टेलीकॉम लाइसेंस फीस को मौजूदा तीन प्रतिशत से घटाकर 0.5 या एक प्रतिशत करने की मांग की है, संगठन का तर्क है कि मौजूदा फीस ऑपरेटरों पर भारी बोझ डाल रही है और इसे सिर्फ प्रशासनिक खर्च की जरूरत तक सीमित किया जाना चाहिए।
संगठन ने सुझाव दिया कि स्पेक्ट्रम पर रिवर्स चार्ज भुगतान, लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज पर लगने वाली 18 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर पांच प्रतिशत किया जा सकता है, सीओएआई का कहना है कि इससे सरकार की आय पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा और इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा को कम करने में मदद मिलेगी।
सीओएआई के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल डॉ एस पी कोचर ने कहा कि ऐसे उपाय टेलीकॉम सेक्टर के वित्तीय बोझ को कम करने में मदद करेंगे, इससे अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी का विस्तार और रोलआउट तेज होगा और विकसित भारत लक्ष्य को हासिल करने में सहायता मिलेगी।
कोचर के अनुसार लाइसेंस फीस में लाइसेंस (एजीआर का तीन प्रतिशत) और डिजिटल भारत निधि योगदान (एजीआर का पांच प्रतिशत) शामिल है, उन्होंने कहा कि यह लाइसेंस्ड टेलीकॉम कंपनियों पर बड़ा वित्तीय दबाव डाल रहा है।
सीओएआई ने मांग की कि डिजिटल भारत निधि योगदान को अस्थायी रूप से रोका जाए, जब तक कि टेलीकम्युनिकेशन विभाग द्वारा अप्रयुक्त निधि का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो जाता।
संगठन ने यह भी सिफारिश की कि एलएफ, एसयूसी और नीलामी के तहत दिए जाने वाले स्पेक्ट्रम भुगतान पर जीएसटी में विशेष राहत दी जाए, ताकि टेलीकॉम ऑपरेटरों पर लगने वाले नियामक शुल्क कम हो सकें।
बजट 2026-27 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा एक फरवरी को पेश किया जाएगा, यह उनका लगातार नौवां बजट होगा और इस मामले में वे पहले ही रिकॉर्ड दर्ज कर चुकी हैं।
यदि सीतारमण अगले वर्ष यानी वित्त वर्ष 2028 का बजट भी पेश करती हैं, तो वे दिवंगत मोरारजी देसाई की बराबरी कर लेंगी, जिन्होंने दो कार्यकालों में कुल 10 बजट पेश किए थे।
