भारतीय परंपरा में गौ को “माँ” का दर्जा दिया गया है और शास्त्रों में इसके पूजन, परिक्रमा और सेवा को अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार गाय की परिक्रमा करने, उसके स्पर्श व पूजन करने से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि शारीरिक, बौद्धिक और आर्थिक स्तर पर भी अनेक लाभ प्राप्त होते हैं।
गौ माता के खुर की मिट्टी का तिलक
आस्था और विश्वास से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार देशी गाय के खुर से लगी मिट्टी का तिलक करना अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा करने से भाग्य में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। ग्रामीण समाज में आज भी यह परंपरा जीवित है, जहाँ शुभ कार्यों से पहले लोग इस तिलक को विशेष महत्व देते हैं।
पंचगव्य का औषधीय महत्व
गौ माता से प्राप्त पाँच तत्व — दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर — जिन्हें पंचगव्य कहा जाता है, आयुर्वेद में विशिष्ट स्थान रखते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि पंचगव्य का सेवन अथवा प्रयोग शारीरिक व मानसिक दोषों को दूर करने में सहायक होता है। इसके नियमित उपयोग से पाचन शक्ति मजबूत होती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है।
आर्थिक और आध्यात्मिक लाभ
गौ सेवा को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। दूध और उससे बने उत्पाद स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ आय का स्रोत भी हैं। वहीं, गोबर और गोमूत्र का प्रयोग जैविक खेती और औषधि निर्माण में बढ़-चढ़कर किया जा रहा है। इससे आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बल मिलता है।
निष्कर्ष
गौ पूजा और पंचगव्य का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू — स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति — से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में गौ को सर्वदा आदर और वंदन का स्थान प्राप्त है।