भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में पांच स्थान की बढ़ोतरी

साल 2026 में भारतीय पासपोर्ट की ग्लोबल रैंकिंग में पांच पायदान का सुधार हुआ है, अब भारतीय पासपोर्ट धारकों को 55 देशों में बिना वीजा, वीजा ऑन अराइवल या ईटीए की सुविधा मिलेगी।

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में भारत को 80वां स्थान मिला है, इसी रैंक पर अल्जीरिया और नाइजर भी शामिल हैं, यह सुधार भारतीय यात्रियों के लिए अहम माना जा रहा है।

लिस्ट में सिंगापुर पहले स्थान पर रहा है, उसके पासपोर्ट से 192 देशों में बिना वीजा यात्रा संभव है, जापान और दक्षिण कोरिया 188 देशों की पहुंच के साथ उसके बाद आते हैं, इससे वैश्विक गतिशीलता और आर्थिक ताकत के संबंध स्पष्ट दिखते हैं।

भारतीय यात्री दक्षिण एशिया, अफ्रीका, कैरिबियन और कई द्वीपीय देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं, हालांकि यूरोप, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और पूर्वी एशिया के कई देशों के लिए अभी भी वीजा की जरूरत बनी हुई है।

सूची के शीर्ष 10 स्थानों पर अधिकतर यूरोपीय देशों का दबदबा है, इन देशों के पासपोर्ट से 180 से अधिक देशों में यात्रा की सुविधा मिलती है।

अफगानिस्तान का पासपोर्ट सबसे कमजोर रहा है, उसके नागरिक केवल 24 देशों में ही यात्रा कर सकते हैं, इससे भू-राजनीतिक और आर्थिक कारकों की भूमिका स्पष्ट होती है।

अमेरिका इस बार फिर से शीर्ष 10 में शामिल हुआ है, हालांकि अमेरिका और ब्रिटेन दोनों की पासपोर्ट शक्ति में पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी गिरावट हुई है।

हेनले एंड पार्टनर्स के चेयरमैन डॉ क्रिश्चियन एच केलिन ने कहा कि पिछले दो दशकों में यात्रा सुविधा बढ़ी है, लेकिन इसका लाभ असमान रूप से बंटा है, पासपोर्ट अब अवसर और सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है

डेनमार्क, लक्जमबर्ग, स्पेन, स्वीडन और स्विट्जरलैंड तीसरे स्थान पर हैं, यहां से 186 देशों में यात्रा संभव है, वहीं 10 यूरोपीय देशों ने चौथा स्थान संयुक्त रूप से साझा किया है।

संयुक्त अरब अमीरात ने 20 वर्षों में सबसे तेज प्रगति की है, 2006 से अब तक वह 149 नए देशों में वीजा मुक्त पहुंच हासिल कर चुका है, अब यूएई पांचवें स्थान पर है, जो उसकी कूटनीतिक और आर्थिक नीति की सफलता को दर्शाता है।

चीन को 59वां स्थान मिला है, चीनी नागरिक 81 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं, जबकि भारत की रैंक सुधार आर्थिक और वैश्विक संपर्क बढ़ने का संकेत देती है।