“ओजस: सेहत का बैंक बैलेंस, खाली हुआ तो बीमारी पक्की”

आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ में लोग अकसर शरीर की असली पूंजी को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह पूंजी है – “ओजस”, जिसे सेहत का बैंक अकाउंट कहा जाता है। जिस प्रकार बैंक बैलेंस घटने पर आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है, उसी तरह ओजस की कमी होने पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ निश्चित हो जाती हैं।


ओजस क्या है?

आयुर्वेद में ओजस को शरीर की जीवनी शक्ति और प्रतिरक्षा क्षमता का आधार माना गया है। यह शरीर में सात धातुओं (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र) के पूर्ण पोषण से उत्पन्न होता है। ओजस की प्रचुरता से व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है बल्कि मानसिक रूप से भी संतुलित और ऊर्जावान महसूस करता है।


जब घटता है ओजस

ओजस के क्षीण होने पर शरीर रोगों का घर बनने लगता है। इसका सीधा असर प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है। लक्षणों में –

  • बार-बार सर्दी-जुकाम होना
  • थकान और कमजोरी
  • चिड़चिड़ापन और तनाव
  • त्वचा की कांति का कम होना
  • नींद की कमी

इन संकेतों को नजरअंदाज करना लंबे समय के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।


ओजस बढ़ाने के उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि ओजस को बढ़ाना बैंक बैलेंस बढ़ाने जितना ही जरूरी है। इसके लिए –

  • सात्त्विक आहार: ताजे फल, दूध, घी और मेवे का सेवन करें।
  • योग व प्राणायाम: प्रतिदिन प्राणायाम से शरीर में ऊर्जा प्रवाह बढ़ता है।
  • ध्यान व सकारात्मक सोच: मानसिक शांति से ओजस की रक्षा होती है।
  • पर्याप्त नींद: गहरी नींद शरीर को नया जीवन देती है।
  • सेवा और करुणा: दूसरों की मदद से भी मानसिक ओजस का संवर्धन होता है।

निष्कर्ष

ओजस को स्वास्थ्य का छुपा हुआ खजाना कहा जा सकता है। जैसे बैंक बैलेंस सुरक्षित रखने के लिए सावधानी जरूरी होती है, वैसे ही ओजस की सुरक्षा भी जीवनभर जरूरी है। जहां ओजस घटा, वहां स्वास्थ्य संकट तय है। इसलिए सजग रहना ही समझदारी है।