अयोध्या में राम मंदिर की दान राशि को लेकर उठे सवालों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का संत समाज ने स्वागत किया है। विभिन्न संतों और धार्मिक नेताओं ने इसे पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है।
आर्य संत वरुण दास महाराज ने कहा कि दान राशि को लेकर लगातार सामने आ रही खबरों से हिंदू समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। ऐसे में सरकार द्वारा एसआईटी का गठन सकारात्मक पहल है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने भी सरकार के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के साथ-साथ भ्रम फैलाने वाली खबरों की भी पड़ताल होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
महंत सीताराम दास जी महाराज ने बताया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एसआईटी गठन की मांग की थी। सरकार द्वारा इस मांग को स्वीकार करना स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए जाने पर जोर दिया।
पूर्व बाबरी मस्जिद वादी इकबाल अंसारी ने भी एसआईटी जांच का समर्थन करते हुए कहा कि दान राशि को लेकर उठे सभी सवालों के जवाब अब जांच के माध्यम से सामने आ जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच से सभी तथ्य स्पष्ट होंगे।
जानकी रमण कुंज के महंत अनिरुद्ध देव दास जी महाराज ने कहा कि सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एसआईटी का गठन किया है। उनके अनुसार, राम मंदिर से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों से श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई थीं और अब जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
